सपनो का चेहरा
- सपनो का चेहरा
क्या नींद के सपने लिखे जा सकते, हां अगर सपने ठीक से याद हो। खूबसूरत सपने हमेशा याद रहते है।
कल रात एक सपना आया। वो शायद मेरा अब तक का सबसे खूबसूरत सपना रहा होगा। जब दिन की
रौशनी मे उसे अहसास करता हूँ , तो लगता शायद यही हकीकत है, लेकिन सिर्फ सपनो के लिए , क्या वास्तविक जीवन मे इनका कोई अर्थ है। मुझे इस सपने के किरदारों के चेहरे धुंधले से याद है, लेकिन उन सब किरदारों मे एक चेहरा था, जो इस सपने को बेहद खूबसूरत बनता है। वो चेहरा कभी मैंने अपने आस पास नहीं देखा, ना ही कभी कल्पना की, उसका सिर मेरी गोद मे था, उसकी निगाहों की जुर्द पंखुरियों पर हल्की पानी की लहर सी दौड़ रही थी। निगाहों के बादलों र्स्पर्शो की फूलो की जादू भरी दुनिया, वो एक उदास शाम थी, जो तूफानी भावनाएं मे बह जाना चाहती थी। मानसून के दिनों मे हल्की बारिश होने से पहले हवा मे एक नमी, पत्तियों पर हरियाली और मन मे एक उमंग छा जाती है, वैसा ही कुछ मेरे भीतर होने लगा।
ऐसा लगा कि अपने मन की सारी बाते बिखेर दूँ।
हमने आपस मे खूब ढेरो सारी बाते की, उसके एक हाथ पर मेहदी से बना हुआ फूल था।
आँखें मलते हुए सुबह मेरी आँखें खुली, सूर्य की किरण मेरी खिड़की से कमरे मे आ गयी। उस सपने को सोचता हुआ अपने घर के बगीचे जा पंहुचा। उसके हाथ पर बना हुआ फूल बगीचे था,मै और गहरायी से सोचने लगा। लेकिन तलाश थी उस चेहरे की,मेरे मन मे हवाएँ करवटे बदले लगी, मन उदास सुनसान उमड़े घुमड़े सा लगने लगा। जैसे एक प्रेमी को प्रेमिका हमेशा के लिए छोड़ कर जा चुकी हो। क्या वो चेहरा मेरी कल्पनाओं से बना मात्र एक चित्र था।
क्या सपने हमारी दिन की कल्पनाओं की रिहर्सल है, जो रात मे जाकर एक दृश्य बना लेते है।जिसमे अभिनेता ही दर्शक होता है।
🖊️मोहित कुशवाह

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