संदेश

Fish and death

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पेरिस काले आसमान से घिर आया था, आसमान मे उड़ने वाली चिड़िया पास खड़ीं नाव के ऊपर आकार बैठ गयी। नदी अपनी छोटी छोटी लहरो से किनारों को धो रही थी। जनवरी की एक उजली सुबह, पेरिस के घने इलाके, ला सीन, मे एक महाशय लम्बा बटनदार कोट,भूरे रंग की पेंट,और सिर पर गोल टोपी, उदास भूखा, अपनी पतलून की जेब मे हाथ डाल के घूम रहा है। तभी उसे एक कैफे पर नज़र पड़ती है, वह अब टेबल के पास बैठकर कैफे का नज़ारा देख रहा है। कैफे मे अंदर से बहार कि ओर देखने पर नदी के किनारे खड़ी नाव नज़र आ रही है, कैफे मे बैठे लोग सिगरेट के कश के साथ शराब पी रहे है, वेटर विनम्रता से पूछता है- ''सर कुछ ऑर्डर है?'' "वह कुछ थकी गहरी सोच मे है"- "हूँ.. जी हाँ एक गिलास पानी,तभी सामने कि टेबल पीठ कर एक आदमी दिखा जिसे उसने अपने बड़े पुराने दोस्त के रूप मे पहचाना। हेरोल्ड को हर इतवार हाथ मे मछली पकने वाली बंसी ओर कंधे पर टीन का छोटा डिब्बा लटकाकर मरंटो द्वीप पर समुन्दर किनारे बैठकर शाम ढलने तक मछलियां पकड़ा करता था।यही पर वह महाशय साइमन से मुलाकात हुई वो उन दिनों वहाँ नाव चलाया करता था। दोनों अलग अलग ...

बारिश

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पिछले दिनों आयी बारिश कुछ कहना चाहती थी।        बारिश बहुत तेज मूसलाधार थी।  घर के बाहर टांगे कपड़े सब भिग गये.. बिजली भी जा चुकि थी,तो घर से निकलना मुश्किल था,तो मैने अपनी दराज़ से," जॉर्ज ब्युखनर का 'दांतौं की मौत नाटक निकाला और एक कप कॉफी के साथ पढ़ना शुरू कर दिया.. नाटक के दूसरे अंक तक पहुँचते ही बारिश और तेज़ हो गयी। शायद उसे कुछ कहना था। मैने अपने कमरे की खिड़की खोली जहाँ मै बैठकर किताब पढ़ रहा था, तेज़ हवा बारिश कि बूंद के साथ मेरी किताब पर आ गिरी मै वहाँ से हट गया.. कॉफी का कप खिड़की के पास रखा भीगता रहा.. मोहित कुशवाह🖊

सपनो का चेहरा

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सपनो का चेहरा              __________________ क्या नींद के सपने लिखे जा सकते, हां अगर सपने ठीक से याद हो। खूबसूरत सपने हमेशा याद रहते है। कल रात  एक सपना आया। वो शायद मेरा अब तक का सबसे खूबसूरत सपना रहा होगा। जब दिन की रौशनी मे उसे अहसास करता हूँ , तो लगता शायद यही हकीकत है, लेकिन सिर्फ सपनो के लिए , क्या वास्तविक जीवन मे इनका कोई अर्थ है। मुझे इस  सपने के किरदारों के चेहरे धुंधले से याद है, लेकिन उन सब किरदारों मे एक चेहरा था, जो इस सपने को बेहद खूबसूरत बनता है। वो चेहरा कभी मैंने अपने आस पास नहीं देखा, ना ही कभी कल्पना की, उसका सिर मेरी गोद मे था, उसकी निगाहों की जुर्द पंखुरियों पर हल्की पानी की लहर सी दौड़ रही थी। निगाहों के बादलों र्स्पर्शो की फूलो की जादू भरी दुनिया, वो एक उदास शाम थी, जो तूफानी भावनाएं मे बह जाना चाहती थी।   मानसून के दिनों मे  हल्की बारिश होने से पहले हवा मे एक नमी, पत्तियों पर हरियाली और मन मे एक उमंग छा जाती है, वैसा ही कुछ मेरे भीतर होने लगा। ऐसा लगा कि अपने मन की सारी बा...