बारिश

पिछले दिनों आयी बारिश कुछ कहना चाहती थी।

       बारिश बहुत तेज मूसलाधार थी।  घर के बाहर टांगे कपड़े सब भिग गये.. बिजली भी जा चुकि थी,तो घर से निकलना मुश्किल था,तो मैने अपनी दराज़ से," जॉर्ज ब्युखनर का 'दांतौं की मौत नाटक निकाला और एक कप कॉफी के साथ पढ़ना शुरू कर दिया.. नाटक के दूसरे अंक तक पहुँचते ही बारिश और तेज़ हो गयी। शायद उसे कुछ कहना था। मैने अपने कमरे की खिड़की खोली जहाँ मै बैठकर किताब पढ़ रहा था, तेज़ हवा बारिश कि बूंद के साथ मेरी किताब पर आ गिरी
मै वहाँ से हट गया.. कॉफी का कप खिड़की के पास रखा भीगता रहा..

मोहित कुशवाह🖊

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